पीसीएनटीडीए के विलय के बाद उद्योगनगरी में सियासत शुरू

शिवसेना और राष्ट्रवादी ने गिनाए विलय के फायदे; भाजपा ने किया अदालत का दरवाजा खटखटाने का ऐलान
संवाददाता, पिंपरी। राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने हालिया पिंपरी चिंचवड नवनगर विकास प्राधिकरण (पीसीएनटीडीए) बरखास्त कर उसे पुणे महानगर प्रादेशिक विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) में विलय करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद पिंपरी चिंचवड़ की उद्योगनगरी में सियासत गरमा गई है। जहां महाविकास आघाडी सरकार के घटक दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले के फायदे गिनाए वहीं राज्य में प्रतिपक्ष मगर पिंपरी चिंचवड़ मनपा में सत्तारूढ़ रही भाजपा ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है।
शिवसेना के सांसद श्रीरंग बारणे ने एक संवाददाता सम्मेलन के जरिए राज्य सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताकर उसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, पीसीएनटीडीए के विकसित क्षेत्र पिंपरी  चिंचवड मनपा के पास हस्तांतरित करने से कंस्ट्रक्शन परमिशन के अधिकार मनपा को मिले हैं साथ ही नियोजन प्राधिकरण के अधिकार भी मिल गए हैं। जिन भूखंडों पर अतिक्रमण हुआ है वे भी मनपा को हस्तांतरित किये गए हैं। इससे गरीब श्रमिकों के अवैध घरों के नियमितीकरण का रास्ता आसान बन गया है।थेरगांव, रहाटणी, कालेवाडी, वाकड, भोसरी जैसी घनी आबादी वाली बस्तियों में पीसीएनटीडीए के मालिकाने का क्षेत्र मनपा को हस्तांतरित किया गया है। यहां उद्योगनगरी के श्रमिकों ने गुंठा- डेढ़ गुंठा जमीन लेकर अपने घर बनाये हैं। उन घरों को नाममात्र शुल्क में नियमित किया जाय, लोगों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएं और लीजहोल्ड प्रॉपर्टी फ्री करने हमारी मांग है। इसके लिए सुधारित अध्यादेश जारी करने की मांग की जाएगी। इस संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना शहरप्रमुख नगरसेवक एड. सचिन भोसले, पूर्व विधायक एड गौतम चाबुकस्वार, महिला मोर्चा की जिला संगठक सुलभा उबाले आदि उपस्थित थे।
यहां भाजपा की ओर से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पीसीएनडीटीए के विलय के फैसले से पिंपरी चिंचवड़ शहर के होनेवाले नुकसान गिनाते हुए फैसले के विरोध में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का ऐलान किया गया। भाजपा के शहराध्यक्ष व विधायक महेश लांडगे, विधायक लक्ष्मण जगताप ने इसकी जानकारी दी। विधायक लांडगे ने कहा कि, पीसीएनटीडीए की जमीनें और डिपॉजिट पीएमआरडीए इस्तेमाल कर सके, इसके लिए विलय का फैसला किया गया है। मूलतः पीसीएनटीडीए की स्थापना का उद्देश्य सफल नहीं हुआ है। भूमिपुत्रों को साढ़े 12 फीसद जमीन वापसी का लाभ नहीं मिला है। प्राधिकरण का स्वतंत्र अस्तित्व रहे यही हमारी मांग है।

जनहित याचिका दायर करने के साथ ही विधानसभा के सत्र में इसका विरोध किया जाएगा। विधायक जगताप ने कहा कि,  यह फैसला शहवासियों के लिए नुकसानदेह है। अगर पीसीएनटीडीए विलिनीकरण मनपा में किया जाता तो वह ज्यादा सहूलियत वाला साबित होता। केवल विकसित क्षेत्र की बजाय संपूर्ण क्षेत्र मनपा के कब्जे में दिए जाने चाहिए थे। नए क्षेत्र पीएमआरडीए विकसित करेगी, भविष्य में इसका बड़ा असर मनपा पर होगा। करीबन 20 हजार करोड की जमीन पीएमआरडीए को दी गई है। निधि की जरूरत को पूरा करने के लिए ये जमीन बिल्डरों को बेची जाएगी। इस मौके पर महापौर ऊषा ढोरे, उपमहापौर हिराबाई घुले, पीसीएनटीडीए के भूतपूर्व अध्यक्ष सदाशिव खाडे, सभागृह नेता नामदेव ढाके, स्थायी समिति सभापति नितीन लांडगे, नगरसेवक मोरेश्वर शेडगे आदि उपस्थित थे।

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