बिहार सरकार ने बताया कि कोविड की मौतों में अचानक उछाल क्यों आई?

पटना, 10 जून (आईएएनएस)। बिहार में कोरोना से मौत के आंकड़ों में एकाएक उछाल आने के बाद से लगातार बिहार सरकार की किरकिरी हो रही है। बिहार में संशोधित कोविड-19 मौतों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने गुरुवार को कहा कि बिहार में मौतों की संख्या में बढ़ोतरी का मुख्य कारण गांव और जिला स्तर पर मौतों की सूचना देने में देरी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, सरकार को विभिन्न स्रोतों से पता चला है कि मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है और फिर इस पर काम करना शुरू किया।

पांडे ने कहा, हमने बिहार में कोरोना से हुई मौतों की वास्तविक संख्या के बारे में मीडिया रिपोटरें सहित विभिन्न स्रोतों से पता चला है। इसलिए, हमने प्रत्येक जिले के जिला मजिस्ट्रेट और सिविल सर्जन को ग्रामीण स्तर पर मौतों की वास्तविक संख्या का पता लगाने का निर्देश दिया था कि बिहार में मौतों की संख्या में अचानक उछाल क्यों आया है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 15 दिनों में मौत के कारणों की भी जांच की जा रही है।

पांडे ने कहा, जब हमें बुधवार को अंतिम आंकड़े मिले, तो हमने इसे सार्वजनिक कर दिया।

बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोनावायरस के कारण 9,429 मौतों की सूचना दी है। बुधवार शाम को जो आंकड़े जारी किए गए, उनमें एक दिन पहले की तुलना में 3,951 अधिक मौतें हुई हैं। बिहार में कोविड से मंगलवार को कुल 5,458 मौतें हुई।

पांडे ने विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस पर राजनीति करने से बचना चाहिए।

पांडे ने कहा, हमने लोगों के हर वर्ग की बात सुनी है और मामले की गहन जांच की है।

इससे पहले, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बिहार में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या को छुपाया है।

उन्होंने कहा, नीतीश-भाजपा सरकार ने बिहार में अपनी छवि को बचाने के लिए आंकड़ों को छुपाया और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर दिया। मैं नीतीश कुमार से अपील करता हूं जिन्होंने दूसरी लहर के दौरान आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया और अब शवों पर राजनीति कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने बिहार के सभी 38 जिलों में मौतों का ब्योरा दिया है, लेकिन यह तारीख और समय या ये मौतें कब हुईं, इसका उल्लेख नहीं किया है। पटना में 2,303 मौतें दर्ज की गई हैं, जो राज्य में सबसे अधिक है, इसके बाद मुजफ्फरपुर (609) और बेगूसराय (316) हैं।

–आईएएनएस

एचके/जेएनएस

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