बिहार में अब मिट्टी की उत्पादकता, आबोहवा के मुताबिक खास फसलों की खेती

पटना, 14 अगस्त (आईएएनएस)| बिहार में अब किसान क्षेत्र की मिट्टी की उत्पादकता और वहां की आबोहवा के अनुकूल खास प्रकार की खेती कर सकेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें परंपरागत कृषि छोड़कर संबंधित क्षेत्रों के अनुकूल फसलों की खेती के लिए कृषि विभाग ने योजना बनाई है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि लीची के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर को लीची के लिए चुना गया है, जबकि रोहतास की मिट्टी और आबोहवा को देखते हुए वहां टमाटर की खेती पर जोर देने के प्रयास किए जाएंगे। समस्तीपुर और अररिया में हरी मिर्च, जबकि पूर्वी चंपारण में लहसुन की खेती को बढ़ावा मिलेगा।

बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने आईएएनएस को बताया कि सरकार की प्रतिबद्घता किसानों के आय में वृद्घि करने की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मौसम और मिट्टी की उत्पादकता को देखते हुए 23 जिलों में खास खेती योजना को हरी झंडी दी है।

कृषि विभाग ने इसके लिए पांच साल के लिए बिहार राज्य उद्यानिक उत्पाद विकास कार्यक्रम बनाया है। चालू वित्त वर्ष से अगले पांच वर्षो तक के लिए बनी इस योजना में 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि किसान खेती करते हैं, परंतु उन्हें उससे उतना लाभ नहीं मिलता है, जितना उनकी मेहनत होती है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए प्रत्येक जिले में 50-50 एकड़ का कलस्टर बनाया जाएगा और उसमें किसानों के अलावा बेरोजगार महिलाओं और पुरुषों को भी जोड़ा जाएगा। समूह के किसानों को उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकिंग के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। समूह खेती करने के साथ-साथ जूस, जैम, जैली आदि का भी निर्माण कराया जाएगा।

सरकार की योजना ऐसे उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की भी होगी। सरकार का मानना है कि समूह खेती से जहां खेती में लागत कम आएगी, वहीं लाभ अधिक प्राप्त किया जा सकता है।

 

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