जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर प्रतिबंध राष्ट्रीय हित में : पीसीआई

नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)| भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने जम्मू एवं कश्मीर में सरकार द्वारा मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को उचित ठहराया है। पीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दी है। इसमें कश्मीर टाइम्स के कार्यकारी संपादक द्वारा दायर याचिका पर हस्तक्षेप करने की अनुमति देने और इस याचिका पर निर्णय लेने में शीर्ष अदालत की मदद करने की अनुमति मांगी गई है।

कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने न्यायालय में अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने और जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद सरकार द्वारा प्रांत में लगाए गए प्रतिबंधों से मीडिया को छूट देने की गुहार लगाई है।

अपनी दलील में भसीन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि राज्य में सभी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाया जाए, ताकि वे अपने पेशे का निर्वहन कर सकें।

पीसीआई ने अपनी अर्जी में कहा है, “पत्रकार/मीडिया की स्वतंत्रता एक बात है और राष्ट्र हित व देश की अखंडता दूसरी बात। इसलिए आवेदक की राय है कि उसे मामले पर अदालत के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने चाहिए और प्रेस की स्वतंत्रता के साथ-साथ राष्ट्र हित में न्यायोचित रूप से त्वरित रिट याचिका को तय करने में न्यायालय की मदद करनी चाहिए।”

पीसीआई ने पत्रकार आचरण खंड 23 के मानदंडों का भी हवाला अपने आवेदन में दिया है, जो संवेदनशील राष्ट्रीय, सामाजिक या व्यक्तिगत हितों के मामलों में पत्रकारों द्वारा रिपोर्टिग में स्व-नियमन को निर्धारित करने की बात कहता है।

इसके साथ ही पीसीआई ने अपनी याचिका में कहा है कि वॉचडॉग संस्था की स्थापना देश में अखबार और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने, प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और सुधारने के उद्देश्य से की गई थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पीसीआई की अर्जी का समर्थन किया है।

बीसीआई के प्रमुख मनन कुमार मिश्रा ने कहा, “आज मीडिया से उम्मीद की जाती है कि वह इस प्रकार से काम करे, जिससे देश को मजबूती मिले। पूरी दुनिया पाकिस्तान और कुछ अन्य राष्ट्रों की मीडिया द्वारा निभाई गई पक्षपाती भूमिका को देख रही है।”

मिश्रा ने कहा कि देश की अखंडता को बरकरार रखने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है और मीडिया इसका अपवाद नहीं है।

उन्होंने कहा, “संविधान ने अनुच्छेद 19 के तहत पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की है, लेकिन यह भी उचित प्रतिबंधों के अधीन है।”

 

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