कोरोना काल में नेताजी ने सीखे खेती के गुर, कोरोना के दो बार हुए थे शिकार

भोपाल, 22 फरवरी (आईएएनएस)। कोरोना महामारी ने लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर डाला है, इसके चलते लोगों की कार्यशैली भी बदली है। बुंदेलखंड के एक नेता तो ने इस काल का उपयोग विचारधाराओं को जानने में तो लगाया ही साथ में खेती के गुर भी सीखे हैं।

बात हम कर रहे हैं बुंदेलखंड के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजा पटेरिया की, वे दिग्विजय सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे। कोरोनावायरस ने दो बार उन्हें अपनी गिरफ्त में लिया और वे दोनों ही बार स्वस्थ होकर निकले, मगर उन्होंने अपने संपर्क में ज्यादा लोगों को नहीं आने दिया।

राजा पटेरिया बताते हैं कि कोरोना काल उनके लिए सीखने का काल रहा है। एक तरफ जहां उन्होंने विभिन्न महापुरुषों की पुस्तकों को पढ़ा। उनकी जीवनशैली को जाना, वहीं विचारधारा को भी करीब से समझा, तो वहीं वे अपना ज्यादातर समय खेती कार्य में लगाते रहे।

बीते लगभग 11 माह के समय में राजा पटेरिया ने दमोह जिले के हटा में अपने डेढ़ एकड़ क्षेत्र में फल और विलुप्त होती प्रजातियों के पौधों का अनूठा संग्रह किया है। उन्होंने डेढ़ सौ से ज्यादा फलदार पौधे रोपे हैं, जिनमें चीकू, आम, अमरूद, बारहमासी आम इसके अलावा 40 से ज्यादा ऐसे पौधे हैं जो विलुप्त होने की श्रेणी में आ गए हैं। इसके अलावा मटर और अदरक की भी खेती की है।

राजा पटेरिया का कहना है कि, खेती को अगर बेहतर तरीके से किया जाए तो व्यक्ति अपने जीवन को आसानी से गुजार सकता है। यह रोजगार का एक बड़ा साधन हो सकती है, इसलिए खेती करने के लिए जरूरी है कि पूरे मनोयोग से खेती की जाए।

पूर्व मंत्री बताते हैं कि उन्होंने एक तरफ जहां खेती के गुर सीखे, वहीं अपने विधानसभा क्षेत्र हटा में लगभग 18 सौ मतदान केंद्रों में से 700 मतदान केंद्रों के मतदाताओं से लगातार संपर्क जारी रखा। ऐसा नहीं है कि राजनीति से दूर रहे मगर ज्यादातर समय खेती को करीब से जानने में लगाया। साथ ही घर में बेकार पड़े सामान से कई तरह की उपयोगी चीजें भी बनाई।

–आईएएनएस

एसएनपी/एएनएम

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