कोरोनाकाल में गूंज की असाधारण पहल

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। इस मुश्किल समय में कुछ समय रुककर उन लोगों के बारे में सोचते हैं, जो कोविड के चलते जीने की कगार पर जा चुके हैं और महामारी की नई लहर ने इन लोगों को और अधिक गरीबी में धकेल दिया है.. अपनी जिंदगी के लिए हर रोज संघर्ष करने वाले ये लोग अब कहीं न कहीं अपनी यह लड़ाई हार रहे हैं।

अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के इस अंक में हम उनकी गरिमा के बारे में बात कर रहे हैं और हम आप सभी से उनके साथ खड़े होने का आग्रह करते हैं।हमारे राहत कोविड कार्य के पिछले एक वर्ष में हम अपने बीच में कुछ छूटे हुए समुदायों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं – यौनकर्मी, ट्रांस-जेंडर, विकलांग, एचआईवी संक्रमित, कुष्ठरोगी एवं अन्य। यहां तक कि जब उनके साथ हमारा मध्य और दीर्घकालिक कार्य जारी है, तब भी भूख की एक बड़ी संख्या में समस्या बनकर नजर आ रही हैं जिसके लिए हम सभी को कदम उठाना चाहिए।

हम ऐसा इसलिए करते हैं ताकि हम एक देश और एक समाज के रूप में हमारे साथ रहने वाले लोगों तक मानवता का भाव पहुंचाना ना भूलें।

मुख्य बिंदु

27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 10,000 टन राशन एवं अन्य जरूरत की चीजें पहुंचाई गईं, 260,000 किलो ग्राम ताजा फल एवं सब्जियां पहुंचाई गई, 1050,000 मास्क, 1,350,000 सैनिटरी नैपकिन, चिकित्सा संबंधी – पीपीई किट, ऑक्सीजन सिलेंडर/ सानद्रक का वितरण किया गया।

इसके अलावा शारीरिक, मानसिक एवं ²श्य विकलांगता एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सुनिश्चित करने के लिए समाज से गहरी प्रतिक्रिया की मांग करता है। दिल्ली, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र,ओड़िशा एवं तमिलनाडु में पिछले कुछ महीनों से हम स्कूलों के साथ कार्य कर रहे हैं जो विकलांग लोगों के साथ काम कर रहे हैं ताकि उनके बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और दूसरे चरण में हम तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाद्य किट (राशन किट) पहुंचा रहे हैं जिससे भूख की तत्कालिक जरूरत को पूरा किया जा सके।

अब बात करें यौनकर्मियों की, तो भारत में बहुत सी महिलाएं अपनी आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में यौन कार्य पर निर्भर रहती हैं। उनके काम के इर्द-गिर्द कलंक, भेदभाव और हिंसा एक बड़ी एवं अलग चर्चा का विषय है लेकिन अभी उनकी सबसे बड़ी चुनौती आजीविका का नुकसान है। ओडिशा, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेशमें हमारी टीमें उन तक खाद्य किट और स्वच्छता संबंधी आवश्यक चीजें पहुंचा रही हैं और जब हमें अन्य उनकी अन्य प्रकार की समस्या या जरूरतों का पता पड़ता है तो हम उनके समाधानों पर भी कार्य करते हैं।

ट्रांसजेंडर समुदाय की बात करें, तो हम सभी ट्रांसजेंडर समुदाय के उन संघर्षों या लड़ाई से अवगत हैं, जिसे वे लड़ते आ रहे हैं। अपने अस्तित्व एवं सम्मान के लिए महामारी की वजह से हुए इस लॉकडाउन में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जीविका ना मिलने की कमी, बुनियादी सुविधाएं ना मिलने में कठिनाई, सरकारी योजनाओं, टीकाकरण और अलगाव केंद्रों में जगह ना मिलना जो कि दस्तावेजों की कमी के कारण हो रहा है। भारत के कुछ हिस्सों में भोजन किट और पारिवारिक चिकित्सा किट के साथ समर्थन करने के अलावा इस अद्भुत समुदाय को हमने उन्हें राहत पहुंचाने के लिए स्वयंसेवकों के रूप में शामिल करके उनकी लचीली भावना का दोहन करने का फैसला किया है।

इस क्रम में अब बात करते हैं एचआईवी संक्रमित लोगों के बारे में। एचआईवी संक्रमित लोगों, बच्चों और महिलाओं की बड़े पैमाने पर न केवल कोविड में बल्कि अन्यथा भी अनदेखी की जाती रही है। जबकि हम उनके साथ मध्य और दीर्घावधि में काम करने की कोशिश कर रहे हैं। काफी हद तक ये लोग और बच्चे कलंक और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने के योग्य हैं, जिसमें समानता और सम्मान हो। इनकी तत्काल जरूरत है भूख को मिटाना। अपने कोविड राहत कार्य के तहत हम भारत के विभिन्न हिस्सों में इन सभी लोगों तक राशन कीट पहुंचा रहे हैं।

अब बारी आती है कुष्ठ रोगियों की। पूरे भारत में 750 कुष्ठ कॉलोनियों में रहने वाले 20,000 लोगों को अ²श्यता और उपेक्षा में धकेल दिया गया है, जिसमें उनके लिए बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है जैसे स्वच्छ पानी, शौचालय, दैनिक दवाओं और पट्टियों और यहां तक कि प्रतिदिन भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच नहीं है, उनकी दुर्दशा का कोई अंत नहीं है। हमारे (गूंज की टीम) इन प्रयासों का उद्देश्य भूख और स्वास्थ्य जैसे इन प्रमुख मुद्दों को संबोधित करना एवं अन्य कमियों को भरना है। कुष्ठ रोग के ज्यादातर मामलों में अल्सर के घावों के आसपास की पट्टियों को हर 2-3 दिनों में बदलना पड़ता है। ज्यादातर जगहों पर योगदान आना बंद हो गया है जिससे इन लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

कलाकारों एवं शिल्पकारों की तरफ एक कदम आगे बढ़ाते हुए और इन्हें जीवित रखने के लिए गूंज उनके साथ कई स्तरों पर काम कर रहा है और इन्हें पहलों में शामिल किया गया है , जैसे कि राहत किट में शामिल बांस की टोकरियां या कपड़े के थैले, साथ ही उनकी आजीविका का समर्थन करते हुए और उन्हें भोजन किट और स्वच्छता आवश्यकताओं जैसी आवश्यक चीजों तक पहुंचाना।

कार्य क्षेत्र से जानकारी:

प्राथमिक सहयोग : अप्रैल 2020 से मार्च 2021 व अप्रैल 2021 से मई 2021।

9,000 टन से अधिक राशन और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई गई, 435,000 परिवारों तक तैयार भोजन चैनलाइज किया गया, फेस मास्क व सैनेटरी पैड का वितरण किया गया, किसानो से सीधे तौर से फल और सब्जिया खरीदी गई, 70,000 से अधिक परिवारों तक दवाइयों की किट पहुंचाई गई, 9,500 से अधिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को किट प्रदान की गई, 30,000 से अधिक पीपीई किट, ऑक्सीजन सिलेंडर का वितरण किया गया, 1,500 से अधिक सब्जी बागान लगाए गए, 400 से अधिक तालाब, 800 से अधिक नहर, 1,000 से अधिक निजी स्नानघर एवं शौचालयों का निर्माण कराया गया इत्यादि।

हमारा साथ दें: 

सामग्री सहयोग के रूप में – https://bit.ly/2yR000h 

राशि सहयोग लिये-  goonj.org/donate    

गूँज के लिए फण्ड रेजिंग कैंपेन शुरू करने के लिए हमे [email protected] पर मेल करे।

पिछली डिग्निटी डायरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें:  http://bit.ly/2K1JH3e

संपर्क करे :
मुख्यालय : J-93, सरिता विहार, नई दिल्ली – 76
011-26972351/41401216
www.goonj.org
[email protected]
–आईएएनएस

एएसएन

You might also like

Comments are closed.