असुविधाओं की मार झेल रहे कानून के रखवाले

– फरासखाना और विश्रामबाग पुलिस स्टेशनों में सुविधाओं का टोटा

गुणवंती परस्ते

पुणे: शहर की कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने वाले पुलिसकर्मी अपनों की बेरुखी का सामना कर रहे हैं। फरासखाना और विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिसकर्मी पिछले काफी वक़्त से असुविधाओं का मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। हालात ये हो चले हैं कि इन्हें पीना का पानी तक नसीब नहीं होता। कुछ पुलिसकर्मी घर से इंतजाम करके आते हैं, तो कुछ को बाज़ार से पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। बात केवल इतनी नहीं है, यहाँ के शौचालयों की स्थिति इतनी बदतर है कि जाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। मालूम हो कि फरासखाना और विश्रामबाग पुलिस स्टेशन एक ही बिल्डिंग में चलते हैं। केवल पुलिसकर्मी ही नहीं अपनी फरियाद लेकर पुलिस स्टेशन आने वाले लोगों को भी असुविधाओं की मार झेलनी पड़ती है। पुणे समाचार प्रतिनिधि ने जब यहाँ का जायजा लिया, तो पाया कि ऐसे माहौल में पुलिसकर्मियों के काम करना बेहद मुश्किल है।

यहाँ भी सीमा की लड़ाई 

पुलिस स्टेशनों के बीच सीमा की लड़ाई आम बात है। और एक ही बिल्डिंग में चलने वाले फरासखाना एवं विश्रामबाग पुलिस स्टेशन भी इससे अछूते नहीं हैं। जब बात सुविधाएं उ[लब्ध कराने की आती है, तो दोनों एक दूसरे पर अपनी ज़िम्मेदारी डाल देते हैं। वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थों की परेशानियों के अच्छे से वाकिफ हैं, लेकिन वह उनका हल तलाशने की जहमत नहीं उठाते।

धूल खा रहा प्रस्ताव

चौंकाने वाली बात यह है कि फरासखाना और विश्रामबाग पुलिस स्टेशन की बिल्डिंग में पीएमसी द्वारा जलापूर्ति ही नहीं की जाती, लिहाजा पुलिसकर्मियों को रोजमर्रा की ज़रूरतों के लिए पानी भरकर रखना पड़ता है। पीने के पानी के लिए यहाँ कोई टंकी ही नहीं है। हालांकि बाहर एक टंकी बनवाई ज़रूर गई थी, लेकिन पिछले एक साल से उसकी सफाई नहीं की गई है। ऐसे में उसका होना न होना बराबर है। पूरी बिल्डिंग में पानी के तीन नल है, जिसमें बोरिंग का पानी आता है, जिसे पीने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। चार महीने पहले पीडब्ल्यूडी को पीने के पानी की टंकी लगाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वो प्रस्ताव धूल खा रहा है।

वरिष्ठों के केबिन चकाचक

फरासखना और विश्रामबाग पुलिस स्टेशनों की हालात भले ही ख़राब हो, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के केबिन चकाचक हैं। ज्यादातर अधिकारियों के केबिन में टायलेट होते हैं, इसलिए उन्हें दूसरे पुलिसकर्मियों का दर्द समझ नहीं आता। फरासखाना पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर बालासाहब अंबुरे ने इस बारे में कहा, ‘यहां सभी नलों में कम दवाब में पानी आता है, वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करके जल्द ही इस समस्या का हल किया जाएगा। वहीं विश्रामबाग पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शिंदे ने बताया कि पानी की टंकी के निर्माण के लिए चार महीने पहले पीडब्लयूडी को प्रस्ताव भेजा गया था।

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