मावल भाजपा को मिलने की गुंजाइश नहीं रही

विधायक लक्ष्मण जगताप की जानकारी; कहा नामांकन तक कायम रहेगा दावा

पिंपरी : समाचार ऑनलाईन – अब की बार हर हाल में संसद पहुंचने की ठान बैठे भाजपा शहराध्यक्ष व विधायक लक्ष्मण जगताप की उम्मीद अब तकरीबन खत्म हो गई है। शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने खुद यह स्वीकार किया कि अब मावल लोकसभा चुनाव क्षेत्र भाजपा को मिलने की गुंजाइश नहीं रही। क्योंकि गत दस सालों से अपने कब्जे में रही इस सीट को छोड़ने को लेकर शिवसेना तैयार नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नामांकन पत्र दाखिल करने तक उनका इस सीट पर दावा कायम रहेगा।
विधानपरिषद और विधानसभा में तीन बार विधायक चुने गए जगताप इस बार मावल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। शिवसेना और भाजपा का गठबंधन होने के बाद भी वे मावल की सीट को लेकर आग्रही रहे। उनके समर्थक नगरसेवकों ने इसके लिये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर यह सीट भाजपा के पास लेने की मांग की थी। इसके अलावा ऑनलाइन कैंपेनिंग चलाकर लोगों की राय जानने की कोशिश की गई। मगर शिवसेना दस साल से अपने कब्जे में रही इस सीट को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रही।
मावल की सीट पाने के लिए विधायक लक्ष्मण जगताप और उनके समर्थकों ने भाजपा के साथ साथ शिवसेना पर भी दबाव बनाने की कोशिश की। शिवसेना अगर मौजूदा सांसद श्रीरंग बारने को ही टिकट देती है और वे हार जाते हैं तो उसके लिए भाजपा को जिम्मेदार न ठहराया जाय। इस तरह की बयानबाजी कर बारने की उम्मीदवारी का विरोध किया गया। इसके लिए बारने की भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी बयानबाजी से भाजपा कार्यकर्ताओं में रही नाराजगी का तर्क दिया गया। हालांकि जगताप और बारने के बीच 36 का आंकड़ा जगजाहिर है।
आज जब खुद विधायक जगताप ने खुद स्वीकारा कि मावल की सीट शिवसेना छोड़ने के लिए तैयार नहीं रहने से गुंजाइश नहीं रही। तब उनसे गठबंधन धर्म का पालन करने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मैंने अधर्म का कोई काम किया ही नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जिसके बारे में धर्म का पालन करने की बात हो रही हो वह भी उसके काबिल होना चाहिए। अगर शिवसेना मनपा की सत्ता में भागीदारी के लिए कहती है, तो मांग करने पर  कि मनपा में कई समितियां हैं, यह भी उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा। स्थायी समिति सदस्यों का कार्यकाल दो की बजाय एक साल का तय करने की नीति पर अमल के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कही।
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